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Friday, 4 September 2020

कुल्हाड़ी घाट डिजिटल युग मे भी मोबाइल नेटवर्क के लिए तरस रही। kulhadi ghat mobile tower

kulhadi ghat mobile tower
मैनपुर। ब्लॉक मुख्यालय मैनपुर से 16 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कुल्हाड़ी (kulhadi ghat)घाट किसी पहचान के लिए मोहताज नहीं यहां पर बड़े अधिकारियों एवं बड़े राजनेताओं का आना जाना लगा ही रहता है।
गढ़चिरौली मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत कुल्हाड़ी घाट वनांचल क्षेत्र से घिरा हुआ आदिवासी कमार बाहुल्य क्षेत्र जिसको 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने गोद लिया है जहां पर राजीव गांधी जी को कंदमूल खिलाने वाली बल्दी भाई आज भी रहती है।
कुल्हाड़ी घाट ग्राम पंचायत के ग्रामीण किसी पहचान के लिए मोहताज नहीं परंतु नेटवर्क कनेक्टिविटी मोबाइल टावर (mobile tower) के लिए मोहताज जरूर है।
मोबाइल टावर मैनपुर क्षेत्र के आसपास की ही गांव को कवर करती है परंतु शहर से सुदूर इलाके जहां पर मोबाइल नेटवर्क का होना अति आवश्यक है कुल्हाड़ी घाट (kulhadi ghat) के लोग आज भी डिजिटल दुनिया में मोबाइल नेटवर्क (mobile network) के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
मैनपुर मुख्यालय में ही जिओ नेटवर्क बीएसएनएल आईडिया एयरटेल आदि नेटवर्क सुविधाएं दी गई है परंतु मैनपुर से 16 किलोमीटर दूर होने की वजह से ग्राम पंचायत कुल्हाड़ी घाट (kulhadi ghat) को नेटवर्क नहीं पहुंच पाती।
ऐसे में गोद ग्राम होते हुए भी ग्राम पंचायत कुल्हाड़ी घाट एरिया नेटवर्क कनेक्टिविटी से पूरी तरह दूरी बनी हुई है। मोबाइल नेटवर्क आज की आधुनिक युग में रोजमर्रा की उपयोग के लिए आम बात हो चुकी है ऐसे में ग्राम पंचायत कुल्हाड़ी घाट के लोगों को बहुत ही बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
यहां के लोग बीमार अथवा अचानक घटना होने पर स्वास्थ्य सेवा के लिए एंबुलेंस को कॉल लगाने हेतु निश्चित जगहों पर अथवा ऊंचे स्थानों पर नेटवर्क के लिए जाना पड़ता है।
अक्सर दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में प्राइवेट नेटवर्क कंपनियां अपनी टावर (mobile tower) लगाने से कतराती है क्योंकि प्राइवेट कंपनियां अपनी प्रॉफिट कमाना चाहती है परंतु सरकारी नेटवर्क कंपनी बीएसएनएल की सर्विस प्रारंभ की जा सकती है यहां के लोग लगातार मोबाइल टावर के लिए मांग कर चुके हैं परंतु आज तक यहां मोबाइल टावर की सुविधाएं नहीं दी गई।

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